हर साल इस रात निधिवन में श्रीकृष्ण गोपियों संग रचाते हैं रास

बुधवार, 24 अक्टूबर को आश्विन मास की पूर्णिमा है। इसे शरद पूर्णिमा कहा जाता है। शास्त्रों में इस पूर्णिमा का काफी अधिक महत्व बताया गया है। उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा के अनुसार द्वापर युग में भगवान श्रीकृष्ण ने शरद पूर्णिमा की रात में ही गोपियों के साथ रासलीला की थी। मान्यता है कि हर साल शरद पूर्णिमा की रात श्रीकृष्ण गोपियों के साथ वृंदावन के निधिवन में रासलीला रचाते हैं। इसी वजह से निधिवन को आज भी रहस्यमयी माना जाता है।

जानिए शरद पूर्णिमा के संबंध में प्रचलित कथा और निधिवन से जुड़ी खास बातें.
द्वापर युग में एक बार जब सभी गोपियों ने श्रीकृष्ण से उन्हें पति रूप में पाने की इच्छा प्रकट की तो श्रीकृष्ण ने गोपियों की इस कामना को पूरी करने का वचन दिया।

इस वचन को पूरा करने के लिए भगवान ने रास आयोजित किया। शरद पूर्णिमा की रात चंद्र अपनी 16 कलाओं के साथ दिखाई देता है, इसलिए इस रात में सबसे ज्यादा सुंदर दिखता है। इसीलिए शरद पूर्णिमा की रात को यमुना तट के पास निधिवन में गोपियों को मिलने के लिए कहा।
सभी गोपियां तैयार होकर निधिवन पहुंच गईं। यहां श्रीकृष्ण ने एक अद्भुत लीला दिखाई। उस समय निधिवन में जितनी गोपियां थीं, श्रीकृष्ण ने उतने ही रूप धारण किए और सभी गोपियों के साथ रास रचाया।
जानिए निधिवन से जुड़ी खास बातें...
निधिवन में तुलसी के पेड़ हैं। इन सभी पेड़ों की शाखाएं जमीन की ओर आती हैं। रास्ता बनाने के लिए इन पेड़ों को डंडे के सहारे रोका गया है।

मान्यता है कि निधिवन में बने रंग महल में रोज रात को राधा-कृष्ण आते हैं। रंग महल में राधा और श्रीकृष्ण के लिए रखे गए चंदन के पलंग को शाम सात बजे के पहले सजा दिया जाता है। पलंग के पास ही एक लोटा पानी, राधाजी के श्रृंगार का सामान, दातुन, पान रख दिया जाता है।
सुबह पांच बजे जब रंग महल खोला जाता है तो बिस्तर अस्त-व्यस्त मिलते हैं। खाली लोटा और उपयोग की हुई दातुन दिखाई देती है। पान भी खाया हुआ मिलता है। माना जाता है कि इन सभी चीजों का उपयोग श्रीकृष्ण और राधा द्वारा किया जाता है।

निधिवन में तुलसी का हर पेड़ जोड़े में है। मान्यता है कि जब श्रीकृष्ण वन में रास रचाते हैं तो ये सभी पेड़ जोड़े में गोपियां बन जाती हैं। जैसे ही सुबह होती है तो फिर तुलसी के पेड़ में बदल जाती हैं
रोज शाम को इस वन को खाली करा दिया जाता है। किसी भी इंसान को इस वन में रुकने की इजाजत नहीं है। यहां मान्यता प्रचलित है कि अगर व्यक्ति रात में इस वन में रुकता है तो उसका मानसिक संतुलन बिगड़ सकता है।

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